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Sunday, April 24, 2011

Na to Roop hai, Na toh rang hai (Lyrics)

One of the most beautiful bhajan I encountered . This Bhajan is written by Shri Bindu Goswami. It elucidates that we are full of deficiencies, yet given a chance for salvation. 


न तो रूप है न तो रंग है , न गुणों की कोई भी खान है |
 मेरे श्याम कैसे शरण में लें, इसी सोच में मेरे प्राण हैं |
 न तो रूप है , न तो रंग है ||

नफ़रत है जिनसे उन्हें सदा, उन्ही अवगुणों में मैं हूँ बंधा | 
कभी कुटिलता है कपट भी है, मद भी  है और अभिमान है |
मेरे श्याम कैसे शरण में लें इसी सोच में मेरे प्राण है |
न तो रूप है न रंग है |

मन क्रम वचन से विचार से लगी लौह इस संसार से, 
पर स्वप्न में भी तो भूल कर कभी उनका कुछ भी न ध्यान है|
मेरे श्याम कैसे शरान में लें , इसी सोच में मेरे प्राण हैं ||
न तो रूप है, न रंग है |

सुख शान्ति की तो तलाश है , साधान न एक भी पास है | 
न तो योग जप तप कर्म है न तो धर्म पुण्य ही दान है |
मेरे श्याम कैसे शरण में लें इसी सोच में मेरे प्राण है ||
न तो रूप है, न रंग है |

एक आसरा है तो है येही, क्यों करेंगे मुझपे कृपा नहीं | 
एक दीनता का हूँ बिंदु मैं , वोह दयालाता के निधान है |
मेरे श्याम कैसे शरण में लें, इसी सोच में मेरे प्राण है || 
न तो रूप है न रंग है .... 

Most beautiful ...

1 comment:

  1. amazing bhajan by bindu ji love it
    jai shree radha raman !!

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